Featured Video Play Icon

फसलों का मुआयना करने के बाद उज्जैन कलेक्टर ने दिया बडा बयान

Ujjain @ कलेक्टर श्री आशीष सिंह ने निर्देश अनुसार 27 अगस्त को विभिन्न जनपदों में ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर अऋणी किसानों से फसल बीमा के प्रस्ताव लिये गये एवं उनका बीमा करने की कार्यवाही की गई। उल्लेखनीय है कि किसान कल्याण तथा कृषि विकास संचालनालय द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ-2020 हेतु फसल बीमा कराने की अन्तिम तिथि 31 अगस्त कर दी गई है। फसल बीमा कराने हेतु किसान बीमा प्रस्ताव पत्र, भू-अधिकार पुस्तिका की फोटोकापी, बोवनी का प्रमाण-पत्र (पटवारी अथवा ग्राम पंचायत सचिव से), आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड एवं बैंक पासबुक की छायाप्रति लेकर अपनी फसल का बीमा करवा सकते हैं।

कृषि विज्ञान केन्द्र उज्जैन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.आरपी शर्मा ने बताया कि सोयाबीन की फसल में विभिन्न कीटव्याधियों द्वारा हो रहे बड़े पैमाने पर नुकसान को रोकने के लिये तत्काल किसान भाई टेबूकोनाझोल+सल्फर एक कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें। जिले की विभिन्न तहसीलों में सोयाबीन की फसल पर विभिन्न कीटव्याधियों एवं विषाणु रोगों का प्रकोप चल रहा है। इस कारण से सोयाबीन की फसल देखते-देखते पीली पड़ रही है। साथ ही सोयाबीन की फसल में तना छेदक इल्लियों का भी प्रकोप हो रहा है। उन्होंने कहा है कि किसान इससे घबराये नहीं और यदि वे वैज्ञानिकों की सलाह के अनुरूप दवाई का छिड़काव करते हैं तो अभी भी सोयाबीन में नुकसान को कम किया जा सकता है। श्री शर्मा ने सलाह दी है कि टेबूकोनाझोल (625 मि.ली./हे.) अथवा टेबूकोनाझोल+सल्फर (1 कि.ग्रा./हे.) अथवा पायरोक्लोस्ट्रोबीन 20 डब्ल्यू.जी. (500 ग्रा./हे.) अथवा हेक्जाकोनाझोल 5 प्रतिशत ई.सी. (800 मि.ली./हे.) से छिड़काव करने से अब तक जितना नुकसान हुआ है उसको छोड़कर आगे का नुकसान शत-प्रतिशत रोका जा सकता है।

No Comments

Leave A Comment