भारत-चीन के बीच अप्रैल 19 से फरवरी 20 के बीच 5.50 लाख करोड़ रुपए का हुआ कारोबार

World @ पहले कोरोनावायरस और फिर लद्दाख सीमा पर भारत-चीन की सेनाओं के बीच टकराव। इन दोनों वजहों से देश में एक बार फिर चीन का विरोध शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर लगातार #boycottchineseproduct जैसे हैशटैग ट्रेंड हो रहे हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2019 से लेकर फरवरी 2020 के बीच भारत-चीन के बीच 5 लाख 50 हजार करोड़ रुपए का कारोबार हुआ।

इसमें से भारत ने तो सिर्फ 1.09 लाख करोड़ का सामान चीन को बेचा, लेकिन इससे चार गुना यानी 4.40 लाख करोड़ रुपए का सामान चीन से खरीदा। अमेरिका के बाद चीन हमारा दूसरा सबसे बड़ा कारोबारी देश है। ये आंकड़े मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के हैं।

पिछले साल 9 जुलाई को लोकसभा में केमिकल मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने बताया था कि भारत जरूरी दवाइयों को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर है। उनके जवाब के मुताबिक, 2016-17 से लेकर 2018-19 तक दवाइयों के लिए जितना कच्चा माल दूसरे देशों से भारत ने खरीदा था, उसमें से 65% चीन से आया था।

2018-19 में भारत ने कुल 3.56 अरब डॉलर यानी 26 हजार 700 करोड़ रुपए का कच्चा माल खरीदा था। इसमें से 2.40 अरब डॉलर यानी 18 हजार करोड़ रुपए का माल चीन से आया था।

मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स के तहत आने वाले डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में एफडीआई के जरिए सबसे ज्यादा निवेश सिंगापुर से आता है। सिंगापुर ने पिछले तीन साल में 2.94 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया है।

जबकि, भारत में सबसे ज्यादा निवेश करने वाले देशों में चीन 18वें नंबर पर है। चीन ने 2019-20 में 1 हजार 157 करोड़ रुपए इन्वेस्ट किए। वहीं, 2014-15 से लेकर 2019-20 के बीच 6 सालों में चीन से 12 हजार 916 करोड़ रुपए का निवेश आया।

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