मध्यप्रदेश में गंभीर बिमारी के लोगों की सरकार नही ले रही सुध
ujjain @ विदेशों से आयातीत लोगों द्वारा देश भर में फैलाए गए कोराना रूपी महामारी के कारण देश की गरीब मध्यमवर्गीय ,किसान, मजदूर एवं विभिन्न असाध्य बिमारियों से पिड़ीत रोगियों को लेकर लाॅकडाउन में उनकी चिकित्सा सुविधा को लेकर समूचा प्रशासन व सरकारें कोई ठोस निर्णय नही ले रही है। एक ओर रसुखदारों , मंत्रियों व सत्ताधारी नेताओं तथा ब्यूरो क्रेसी के लिये लाॅकडाउन को जब तक दरकिनार कर दिया जाता है। किन्तु आम जनता के लिये कोई रियायत नही दिखाई दे रही है।
मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार के ये आलम है कि प्रदेश के बाहर फंसे लोगो की व्यवस्था हेतु जारी किये गये हेल्पलाईन नंबर 0755-2708030 एवं 0755-2708003 पर शिकायतें नोट करने वाले व सुनने वाले की कोई व्यवस्था नजर नही आ रही है। पिछले सप्ताह जारी की गई ई-पास की सुविधा के संबंध में किये गये आवेदन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा उसकी कोई समीक्षा नही कर तैनात कम्प्यूटर आॅपरेटर ही उसका निराकरण कर निरस्त कर रहे है। ऐसे अनगिनत मामले है जिसमें आवेदनकर्ता त्रस्त हो रहे है।
महिदपुर नगर के वरिष्ठ पत्रकार बद्री वर्मा द्वारा अपनी पत्नि की चिकित्सा हेतु 20 मार्च से हिमाचलप्रदेश के कांगड़ा जिले की तहसील धर्मशाला के पास शिवनगर में दवाई लेने हेतु गए उनके सुपुत्र गौरव वर्मा एवं मित्र निलेश माण्डीवाल विगत 1 माह से लाॅकडाउन में फंसे हुए है। जिसके कारण दवाई के अभाव में बद्री वर्मा की पत्नि जो किडनी कैंसर जैसे गंभीर बिमारी से परेशान है। वहीं दोनो बालक हिमाचल प्रदेश में मध्यप्रदेश सरकार की खोखली घोषणाओं से उन्है कोई शासकीय सुविधा नही मिल रही है। पिड़ीता को तत्काल चिकित्सा मुहैया हो इस हेतु दिनांक 28 मार्च से निरन्तर मुख्यमंत्री हेल्पलाईन से फंसे युवको को लाने तथा दवाई लाने हेतु पास की मांग की जा रही है। किन्तु घोषणा वीर सरकार सरकार के ये आलम है कि हेल्पलाईन के नंबर या तो नो रिप्लाई होते है या इंगेज होते है अभी कुछ ही दिनों पूर्व मध्यपेदश सरकार द्वारा ई-पास जारी करने हेतु गाईडलाईन जारी की गई है।
परन्तु गंभीर बिमारी के मरीज की चिकित्सा तत्काल हो सके, इस हेतु निजी वाहन से फंसे दोनो युवक को लाने हेतु अलग अलग दिनों मे दो-दो बार ई-पास की मांग की गई किन्तु मानवता को तार तार करने वाली मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दोनो बार आवेदन निरस्त कर दिये । निरस्तीकरण के संबंध मे न तो जिला कलेक्टर उज्जैन एवं न ही मध्यप्रदेश सरकार के पास कोई ठोस कारण बताए जा रहे है। इस प्रकार से कोरोना एवं लाॅकडाउन के नाम पर पूर्व से गंभीर बिमारियों से जुझ रहे मरीजों के लिये तमाम चिकित्सा सुविधाओं को भी लाॅकडाउन कर दिया जाना प्रतीत हो रहा है। एक ओर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लाखों मजदूरों एवं छात्रों को प्रधानमंत्री के द्वारा जारी किये गये नियमों को दरकिनार करते हुए शासकीय बसों से दूसरे प्रदेशों से उत्तर प्रदेश के नागरिकों एवं छात्रों को लाया जा रहा है। वहीं उन्ही की नकल करते हुए मध्यप्रदेश सरकार कोटा में फंसे रसुखदार नेताओ. मंत्रियों एवं उच्च स्तरीय अधिकारियों के बच्चों को बस से लाने के प्रयास कर रही है। किन्तु गरीब , मजबूर , मध्यमवर्गीय जैसे बाहरी व्यक्तियों को लाना तो ठीक जिन्दगी और मौत से जुझ रहे पिड़ीत की दवाई लेने गए युवकों को अपने निजी वाहन से लाने हेतु ई-पास की सुविधा से भी वंचित रखा जा रहा है।
कोरोना के संक्रमण के तले आम व्यक्ति की जीवन में होने वाली गंभीर बिमारियों को दफन कर दिया गया है। आखिर क्या होगा इस प्रदेश के ला-ईलाज बिमारियों की चिकित्सा हेतु जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे पिड़ीतों का। और क्या होगा उन गर्भवती महिलाओं जिनकी कोह में पल रहे बच्चों की समय समय पर जांच के निर्देषों का। ऐसा लगता है अब तो कोरोना व सीमा सील करने के नाम पर जन्म पर भी पहरा सरकार ने लगा दिया है।
यह पीड़ा उस व्यक्ति की है जिसने आपातकाल में जनता सरकार व जनसंघ के झण्डे को लहराने का दुसाहस किया था तथा राम मंदिर व बाबरी मस्जिद विधवंस काल में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह एवं राजनाथसिंह के साथ उत्तरप्रदेश की जोनपुर जेल में नौ दिन तक जेल यात्रा की थी । इन दिग्गज नेताओं ने सत्ता के मद में अपने जेल के साथी की पीड़ा को भी दरकिनार कर दिया। और आज यह स्थिति है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान के जोनपुर जेल के साथी बद्री वर्मा आज अपनी पत्नि की चिकित्सा हेतु दवाई लेने गए अपने पुत्र व उसके साथी को निजी वाहन के ई-पास जारी करवाने हेतु विगत 25 दिन से परेशान हो रहे है किन्तु इस निर्दयी सरकार में न तो किसी पिड़ीत के प्रति कोई संवेदना है और न ही उनकी चिकित्सा के प्रति कोई जिम्मेदारी नजर आ रही है। इस संबंध में व्यथित पत्रकार बद्री वर्मा का यह आरोप है कि क्या फायदा ऐसी गुमराह करने वाली हेल्पलाईनों का ? और क्या फायदा टीवी चैनलों पर जनता का मसीहा का ढोंग करने का ? क्या प्रदेश के किसी मंत्री एवं किसी आला अधिकारी के पुत्र इसी प्रकार से कहीं दूसरे प्रदेश में फंसे होते व उनकी पत्नि इसी तरह की गंभीर बिमारी की चपेट में होती तो क्या उसे कोरोना व लाॅकडाउन के नाम पर इलाज के अभाव में छटपटाने तथा मौत के मुंह में धकेलने का पराक्रम दिखाते ? जो आज आम जनता व बेबस नागरिकों पर दिखा रहे है। यदि किसी भाजपा सरकार व संगठन के अधिकारी में नैतिकता हो तो पत्रकार बद्री वर्मा के साथ हो रहे अन्याय की तरह उन लाखों बेबस गरीब मजदूरो तथा इलाज के अभाव में छंटपटा रहे मरीजों के प्रति अपनी संवेदनशीलता का पराक्रम दिखाने का साहस करेगें ?
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