12 जनवरी को पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की, 43 दिन में आया फैसला
indore @ महू में 4 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। पुलिस ने आरोपी को दोपहर में कोर्ट में पेश किया, जहां उसे दो धाराओं में फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि एक अन्य धारा में आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। 1 दिसंबर 2019 को महू में चक्कीवाले महादेव मंदिर के बाहर सड़क किनारे माता-पिता के साथ सो रही बच्ची को आरोपी उठाकर ले गया था। दूसरे दिन उसका शव 200 मीटर दूर शराब गोदाम के पास बंगला नंबर-122 के खंडरनुमा कमरे में मिला था। आरोपी ने रेप के बाद बच्ची की हत्या कर दी थी। मौत के बाद वह शव को वहीं छोड़कर घर भाग गया था।
जिला लोक अभियोजन अधिकारी मो. अकरम शेख ने बताया कि मामले को जघन्य अपराध की श्रेणी में रखते हुए एसआईटी का गठन किया गया था। जिसके बाद केस को महू से इंदौर ट्रांसफर कर दिया गया था। मामले में कोर्ट ने सोमवार को आरोपी अंकित पिता कमल सिंह विजयवर्गीय निवासी प्रशांति हॉस्पिटल के सामने महू को 363में पांच साल का कठोर कारावास और एक हजार रुपए अर्थदंड, धारा 366 क में पांच साल का कठोर कारावास और एक हजार रुपए का जुर्माना, धारा 201 में पांच साल का कठोर कारावास और एक हजार रुपए का अर्थदंड, धारा 376 एबी और आजीवन कारावास और एक हजार रुपए का अर्थदंड,पास्को एक्ट में आजीवन कारावास और एक हजार रुपए का अर्थदंड के साथ ही 376 ए में मृत्यदंड और धारा 302 में मृत्युदंड के साथ एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। शेख के अनुसार करीब ढाई महीने में मामले में फैसला आया है।
कब क्या हुआ
1 दिसंबर 2019 को महू में चक्कीवाले महादेव मंदिर के बाहर सड़क किनारे माता-पिता के साथ सो रही बच्ची को आरोपी उठाकर ले गया।
2 दिसंबर की सुबह परिजनांे ने बच्ची के लापता होने की रिपोर्ट महू थाने में दर्ज करवाई।
2 दिसंबर को ही बच्ची का शव सोने वाले स्थान से 200 मीटर दूर शराब गोदाम के पास बंगला नंबर-122 के खंडरनुमा कमरे में मिला।
3 दिसंबर को पश्चिम एसपी अवधेश गोस्वामी, पश्चिम एसपी धर्मराज मीणा व एसडीओपी विनोद शर्मा के नेतृत्व में तीन टीमों का गठन किया गया।
4 दिसंबर को ऑटो रिक्शा चालक ने पहचाना, तो पुलिस ने आरोपी को घर से उठाया, फुटेज में दिखा काला जैकेट व सफेद जूते भी उसके पास से ही मिले, तब पुष्टि हुई।
5 दिसंबर को कोतवाली पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां कोर्ट ने उसे तीन दिन की रिमांड पर पुलिस को सौंपा।
6 दिसंबर को एसआईटी का गठन भी किया गया। साथ ही डीएनए रिपोर्ट के लिए महत्वापूर्ण साक्ष्यों की सैंपलिंग कर सैंपलों को एफएसएल की लैब भी भेजा गया।
7 दिसंबर को रिमांड खत्म होने के बाद अारोपी को जेल भेजा गया, कोर्ट में गुस्साए वकीलों ने आरोपी को पीटने की कोशिश भी की।
24 दिसंबर को काेर्ट में चार घंटे में चार गवाहों के बयान हुए। इसमें मुख्य रूप से घटना वाले दिन घटनास्थल पर आराेपी के चार जगहों पर सीसीटीवी में कैद हुए फुटेज भी काेर्ट रूम में प्ले हुए। इस दाैरान आराेपी वीडियाे कान्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायालयीन प्रक्रिया में माैजूद रहा।
12 जनवरी को पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की। 43 दिन में आया फैसला
मामले में कोर्ट में 29 लोगों ने गवाही दी और पुलिस ने 93 दस्तावेज प्रस्तुत किए।
सजा का एक आधार एक बार फिर सीसीटीवी फुटेज और डीएनए रिपोर्ट बनी।
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