महिदपुर जिला बनाओ समिति ने प्रस्तावित नागदा जिले में शामिल करने पर ली कड़ी आपत्ति

Mahidpur @ पिता के होते पुत्र से पूछे बिना किसी दूसरे को दत्तक पुत्र दिए जाने जैसा है प्रस्तावित नागदा जिले में महिदपुर-झारड़ा तहसील को शामिल करना जिसका महिदपुर जिला बनाओ समिति ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए महिदपुर को जिला बनाए जाने की पुरजोर मांग रखते हुए महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं जिलाधीश उज्जैन को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व महिदपुर गौरव पैनल के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा गया है। वर्तमान समय में नगर में धारा 144 लागू होने एवं कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के चलते किसी भी तरह के आंदोलन पर रोक होने के चलते समिति द्वारा ज्ञापन सौंपा गया। समिति अध्यक्ष रामचंद्र ठाकुर, सचिव आशीष सकलेचा, कोषाध्यक्ष गिरधारीलाल उथरा, अशोक नवलखा कांग्रेस प्रवक्ता मध्यप्रदेश, प्रतापसिंह आर्य, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि, भगवती प्रसाद पुरोहित आम आदमी पार्टी संयोजक, भगवानसिंह रुदाहेड़ा, अंतरसिंह राजपूत महिदपुर को जिला बनाए जाने की पुरजोर मांग करते हुए शासन को कड़ी आपत्ति नागदा में महिदपुर एवं झारडा तहसील को शामिल नहीं किए जाने की मांग की गई। समिति सचिव आशीष सकलेचा ने बताया कि समिति द्वारा मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर कड़ी आपत्ति लेते हुए महिदपुर को जिला बनाए जाने को लेकर यह ठोंस तथ्य अपने ज्ञापन में दिए गए हैं कि

1, मध्यप्रदेश सरकार की केबिनेट समिति द्वारा नागदा जिले में महिदपुर- झार्डा तहसील के नागरिकों के अभिमत के बिना एवं दावा/आपत्ति लिए बिना ही राजनीतिक दबाव के चलते आनन फानन में प्रस्तावित नागदा जिले में शामिल कर दिया गया।

2, पूर्व में भी महिदपुर को होलकर रियासत काल में जिले का दर्जा हुआ करता था, जब भारत में रियासतों का विलीनीकरण हुआ था तब संधि समझौते के सर्त के अनुसार जिले को जिला ही रखा जाएगा जिसका पालन नहीं हुआ ओर 1948 में महिदपुर को उज्जैन जिले की तहसील बना दिया गया।

3, महिदपुर का गौरवशाली इतिहास होकर उज्जैन जिले में सबसे अधिक स्वतंत्रता सेनानी होने का गौरव प्राप्त है। होलकर रियासत काल से ही भौगोलिक ऐतिहासिक क्षेत्रीय स्मारक पौराणिक धार्मिक दृष्टिकोण से भी अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। 1896 में उज्जैन में जब महामारी के कारण सिंहस्थ का आयोजन र हुआ था तब महिदपुर के ऐतिहासिक धूर्जटेश्चर महादेव स्थल जहां मोक्षदायिनी मां क्षिप्रा पुर्ववाहिनी है पर आयोजित किया गया था। प्रजामंडल का ऐतिहासिक राष्ट्रीय अधिवेशन गंगावाडी क्षेत्र में संपन्न होने का गवाह महिदपुर रह चुका है।

4, विधि के क्षेत्र में भी महिदपुर का 112 वर्ष पुराना इतिहास रहा है। न्यायालय के रूप में दो अतिरिक्त जिला कोर्ट, सत्र न्यायालय, दो व्यवहार न्यायालय, ग्राम न्यायालय सहित राजस्व न्यायालय पूर्व से ही संस्थित है। पी डब्लू डी, सिंचाई कृषि विभाग के कार्यालय एवं बंगले रियासत के समय से कार्यरत है। यहां यह उल्लेखनीय है कि नागदा कुछ वर्ष पूर्व तक टप्पा होकर अभी ही तहसील का दर्जा मिला है जबकि उसके पास विकास खंड एवं जनपद तक का दर्जा भी अब तक नहीं है जो व्यावहारिक अड़चन है। नवीन बस स्टैण्ड निर्माण के लिए भी नागदा को निजी भूमि क्रय करना पड़ी वहीं अन्य विभागों के कार्यालय निर्माण के लिए खुद की भूमि भी नागदा के पास नहीं है। जबकि महिदपुर में पहले से ही शासन के कार्यालय होकर सेंकड़ों एकड़ शासकीय भूमि लेंड बैंक के रूप में विद्यमान है।

5, प्रस्तावित नागदा जिले की दूरी महिदपुर एवं झारडा तहसील के अनेक गांवों के लिए 60 से 100 किमी तक है जबकि उज्जैन ज्यादा नजदीक पड़ता है। नागदा में शामिल होने पर सभी क्षेत्रवासियों को अपने दस्तावेजों में सुधार करवाना होगा साथ ही राजस्व रिकॉर्ड भी नागदा के मापदंडों से अलग होने पर जमीन का एक बीघा छोटा हो जाएगा जो व्यावहारिक नहीं है। साथ ही सेल टैक्स के लिए महिदपुर के लोग आगर जाते है जबकि जिला नागदा होने पर जिले से संबंधित कार्य के लिए नागदा ओर संभागीय कार्य के लिए उज्जैन के चक्कर लगाता रहेगा जो हमको कतई मंजूर नहीं है।

6, नागदा में फैक्ट्रियों के अपशिष्ठ के कारण वातावरण सबसे अधिक प्रदूषित होता है। परमारखेडी इसका उदाहरण है जन्हा पर दिव्यंगता पैदाइशी होने लगी है ऐसे अनेक गांवों में यही स्थिति है जो मानवीय जीवन के लिए भयावह है। इस तरह महिदपुर जोकि होल्कर रियासत काल में जिला हुआ करता था को पुनः जिले का दर्जा देकर क्षेत्र की जनता के गौरव को पुनः स्थापित किया जाए इस तरह की मांग महिदपुर जिला बनाओ समिति एवं समस्त राजनीतिक सामाजिक सार्वजनिक संस्थाओं की ओर से पुरजोर मांग की जाती है यदि हमारी मां पूर्ण नहीं होती है तो समिति के माध्यम से आगामी समय में चरणबद्ध आंदोलन किए जाएंगे।

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