काशी-महाकाल एक्सप्रेस में महाकाल की सीट आरक्षण को लेकर गर्मायी सियासत
New delhi @ वाराणसी से उज्जैन के बीच शुरू की गई काशी-महाकाल एक्सप्रेस में भगवान शिव के लिए रिजर्व सीट काे लेकर अब सियासत शुरू हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ने पीएमओ को ट्वीट कर ट्रेन में सीट पर शिव मंदिर बनाए जाने को लेकर सवाल उठाए। ओवैसी ने संविधान की एक कॉपी को भी अटैच किया है। मामले में आईआरसीटीसी ने सफाई दी है। एक बयान में कहा- यह व्यवस्था सिर्फ पहले दिन के लिए थी। जो नए प्रोजेक्ट की सफलता के लिए भगवान शिव से “आशीर्वाद” लेने के तौर पर देखी जाए। 20 मार्च से व्यवसायिक रूप से ट्रेन यात्रियों के लिए शुरू होगी, तब ऐसा कोई आरक्षित या समर्पित बर्थ नहीं रहेगी।
इस ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वाराणसी से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। सोमवार को यह इंदौर पहुंची। उत्तर प्रदेश के काशी और मध्य प्रदेश के उज्जैन, ओंकारेश्वर ज्याेतिर्लिंग तीर्थस्थलाें काे जाेड़ने के लिए आईआरसीटीसी की यह निजी ट्रेन है। इसके काेच बी-5 में सीट नंबर 64 काे बाबा महाकाल के लिए आरक्षित रखा गया है। सीट पर मंदिर बनाया है। ऐसा पहली बार है, जब किसी भगवान के लिए सीट आरक्षित की गई है। ट्रेन में भक्ति संगीत, हर कोच में दो निजी गार्ड और केवल शाकाहारी भोजन मिलेगा। यह ट्रेन आम जनता के लिए 20 फरवरी से शुरू होगी।

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